
सुबह सुबह उठना और सीधे साइकिल के पास पहुँचना कि कहीं रात में खडी खड़ी मेरी साइकिल गन्दी तो नहीं हो गयी। और मम्मी पापा से कहकर एक अलग कपडा और बाल्टी रखनी अपनी साइकिल की सफाई के लिए वो सब तो एक सपना सा लगता है अब।
सपने से याद आया, क़ि स्कूल जाते वक़्त जब हमारे पास साइकिल नहीं हुआ करती थी तो स्कूल बस से स्कूल पहुचते थे। पर जब घर वापस आते थे तब और कोई नयी साइकिल लेकर सामने से गुजरता था तब तक उसे देखते थे जब तक वो आँखों से ओझल नहीं हो जाता। वो चमकते हुए साइकिल के रिम और उसकी अनगिनत तिल्लियाँ आँखों में चमक पैदा कर देती थी और पैदा करती थी साथ में एक सपना क़ि मेरी भी एक साइकिल होनी चाहिए।
वो वक़्त ही अलग था। माँ-बाप बच्चों को साइकिल दिलाते थे ताकि उनकी बॉडी में सही ग्रोथ हो, उनकी लंबाई ठीक तरीके से बढे और उनका शरीर स्वस्थ रहे।
और बिलकुल सही भी था यह सब। पर धीरे धीरे साइकिल लोगों की ज़िन्दगी से गायब होती जा रही है।
उसकी जगह लेली है स्कूटर्स ने। अब बच्चे साइकिल की बजाय स्कूटर्स पर स्कूल जाना ज्यादा पसंद करते हैं जिस कारण कई तरह की परेशानियां आम तौर पर देखने को मिलते हैं। जैसे कि बिना लाइसेंस के स्कूटर चलना। ज्यादा गति होने से बच्चों के एक्सीडेंट होना, साथ में प्रदुषण भी बढ़ रहा है और बच्चों के शारीरिक विकास पर भी असर पड़ता है। पर आजकल कल की इस तेज़ दुनिया में इन् सब मूलभूत बातों पर लोगो ने ध्यान देना बंद कर दिया है। धीरे धीरे साइकिल बाज़ार से भी गायब होती जा रही हैं। क्योंकि बच्चों में एक दूसरे की देखा देखी स्कूटर्स की मांग बढ़ना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
पर हम लोग ये भूल जाते हैं कि अगर बच्चे छोटी उम्र से ही स्कूटर चलाना शुरू कर देते है तो कितना बड़ा नुकसान हो सकता है। बच्चे दुसरो को चोट पंहुचा सकते हैं या फिर उनको खुद को भी चोट लग सकती है जिससे उनको कितने ही दिन स्कूल से अलग रहना पड़ सकता है। जिससे उनकी पढाई पर असर पड़ता है और कहीं एक्सीडेंट एग्जाम के दिनों में हो जाये तो गयी भैंस पानी में। मतलब पुरे साल की मेहनत बेकार हो जाती है। दवाइयों का और मरहम पट्टी का खर्च अलग से माँ बाप का कार्य भी प्रभावित होता है और चिंताए बढ़ जाती है। इन् सब चीजों को रोक जा सकता है अगर हम लोग थोड़े जागरूक बने और बच्चों को समझाएं और उनकी सही इच्छाए ही पूरी करें।
अब साइकल्स केवल टीवी में, टी शर्ट्स पर,नेताओ के झंडो पर, रैलियोन् या फिर किताबों और पोस्टर पर ही देखने को मिलती है।
एक बड़ा कारण ये भी है कि बड़े और बच्चों की सोच में भी बहुत अंतर आ रहा है उन्हें लगता है की साइकिल गरीबो की सवारी है। जो भी साइकिल लेकर चलेगा लोग उसे क्या बोलेंगे। अगर कुछ साइकिल बिक भी रही है तो वो भी सेलिब्रिटी स्टार्स को देखकर। इसमें जरुरी यह है की माँ बाप अपनी जिम्मेदारी समझे और बच्चों को साइकिल के फायदे बताये और उन्हें प्रेरित करें साइकिल चलाने को ताकि हमारा भविष्य जो की ये बच्चे ही हैं शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ और विकसित रह सके और एक सफल जीवन की और बढे। उसका दूसरा फायदा ये होगा कि साइकिल का चलन बढ़ने से हमारा प्रदुषण कम होगा और पेट्रोल की भी काफी बचत होगी। एक्सीडेंट कम हो जायेंगे। भीड़भाड़ से निजात मिलेगी। सड़को पर चलना आसान हो जायेगा और वातावरण शुद्ध होगा जिससे हम सब लोगो का स्वास्थ्य भी सही रहेगा और चरों तरफ खुशियों का विस्तार होगा।
तो सभी लोग और बच्चे सोचे और बताएं कि, हैं ना ये एक छोटी सी साइकिल बड़े फायदे की चीज़।
और जाओ और खूब साइकिल चलाओ.
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